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Friday, 28 October 2011

दूध नहीं 'डेयरी व्हाइटनर' है ये, dairy, whitener, milk, adultration, febrication,


दूध में उलटा पुलटा
दूध में पानी चलेगा पर पानी में दूध?

भूपेश चट्ठा, पटियाला
दूध में पानी मिलाना पुरानी बात हुई आजकल किसी को पानी मिले दूध से एतराज भी नहीं है। मल्टी नैशनल कंपनियों ने तो गाय, भैंस या बकरी के  'दूध' को 'दूध' कहना ही बंद कर दिया। इसका नाम 'डेयरी व्हाइटनर' (एक ऐसा पदार्थ जिसे सफेद रंग का पेय पदार्थ जिसे डेयरी में तैयार किया गया हो) बना दिया गया है। ऐसे में आप किसी तरह के भी सफेद रंग के पदार्थ में शुद्ध दूध के सभी गुण नहीं तलाश सकते।

झाग के हैं 10 से 15 फीसदी दाम
दूध के मामले में 'दैनिक जागरणÓ ने मिलावट के रूप में हो रही ठगी पर पाया कि आपके ठीक सामने यदि गाय या भैंस से दूध की धार तेजी से निकाल कर तुरंत ही आपके बर्तन में डाल रहा है तो समझ लीजिए 10 से 15 फीसदी की कुंडी तय है। ग्राहक के बर्तन में झाग ही इतने भर दिए जाते हैं कि बर्तन से बाहर निकलने को होते हैं। कहने पर बताया जाता है कि सारी ताकत ही इसमें है। दिलचस्प है कि इसके लिए जिस बर्तन में दूध निकालना हो उसमें थन धोने के नाम पर गर्म पानी मिला बर्तन को गर्म कर लिया जाता है। वहीं कोई भी डेयरी मालिक धीरे धार निकालने वाले कर्मी से या तो अपने घर के लिए दूध निकलवाता है, या फिर उन लोगों के लिए जो पांच-सात रूपये प्रति लीटर ज्यादा देते हों या फिर वे ग्राहक जो फैट पर आधारित दूध लेते हों।

छोटा ही रहेगा पैमाना 
दूध मापने के लिए पैमाना एक लीटर का भी हो सकता है लेकिन हर दूध देने वाला आधा लीटर का ही प्रयोग करता है। चाहे दो या चार लीटर दूध देना हो फिर भी आधा लीटर का ही पैमाना काम में लिया जाता है। अलबत्ता ये कभी पूरा भरता नहीं भर भी जाए तो उड़ेले जाने तक हर बार दो से चार फीसदी की कुंडी मार जाता है।

दूध से बनाया पनीर और पनीर के पानी से दूध
दूध से पनीर बनाए जाने के बाद बचे पानी को एक बार फिर से दूध बनाए जाने की कवायद इस कदर चल रही है कि हलावाइयों की दुकानों के बाहर फेंका जाने वाला पनीर का पानी अब दिखाई नहीं देता है। इस पानी में रिफांइड मिला कर चिकनाई बनाई जाती है तो हीट देने के लिए यूरिया और फिर थोड़ा सा सूखे दूध का पाउडर जरूरत अनुसार मिलाया जाता है। ऐसे तैयार किए गए सफेद पदार्थ को सस्ते दूध के नाम पर चलते ग्राहक को थमाया जा रहा है। देसी तरीके में इसे पकडऩे के लिए देखा जा सकता है कि जिस बर्तन में आधा घंटा भी बिना गर्म किए रह जाए तो बर्तन चिकना हो जाता है। एक परत पूरे बर्तन में महसूस की जा सकती है। आम अंगुली लगाने भर से ही चिकनाहट महसूस की जा सकती है।

क्रीम निकलवा कर थमाया जाता है सपरेटा 
दूध को दूध ही रखते हुए, कुल दूध में से आधे में पहले क्रीम निकाल कर बेच दी जाती है और फिर शेष दूध मिला कर कम फैट का दूध तैयार कर दिया जाता है। ऐसे दूध को कोई भी उपकरण पकड़ नहीं पाता और ठगी जारी रहती है।

मलाई वाला दही या अरारोट या फिर ब्लोंिटंग पैपर
 हर किसी को पसंद है कि बाजार से दही लिया जाए तो इसमें अच्छी सी फुटी हो या फिर कड़ाही में गर्म हो रहे दूध में से मलाई की परत हो। दिलचस्प है कि ये दोनों ही आपको दारा सिंह बनाने के लिए नहीं होती बल्कि आपकी छाती को जमा देने वाले आरारोट से तैयार की जाती हैं। दही जमाने के लिए  रखे गए दूध में हल्का गर्म कर आरारोट मिला दिया जाता है तो गर्म दूध पर ब्लोटिंग पेपर की परत फैला दी जाती है। ये दोनों ही आर्गेनिक हैं ऐसे में पकडऩे के लिए खासे अनुभव की जरूरत होती है, या दक्षता की बेहतर हो की मलाई का ऐसा लालच ही छोड़ दिया जाए।