युवा भूल गए कारगिल युद्ध में शहीद जांबाजों कोhttp://in.jagran.yahoo.com/epaper/article/index.php?page=article&choice=print_article&location=41&category=&articleid=88892077203080
कारगिल विजय दिवस पर विशेष 2 सबसे अधिक 35 जवान खोने वाली आठ सिख रेजिमेंट, पंजाब रेजिमेंट, जेएंडके राइफल्स, डोगरा रेजिमेंट से भी जवान हुए शहीद
भूपेश चट्ठा, पटियाला : कारगिल के युद्ध में कितनी जानें गईं? कितनों के घर उजड़े? कितना नुकसान हुआ? लड़ाई कितने दिन चली? द्रास, टाइगर हिल क्या हैं? वायु सेना का प्रयोग सीमित क्यों रखा गया? कूटनीतिक विफलता कहां हुई? खुफिया तंत्र क्यों घुसपैठ का पता नहीं लगा पाया? जैसे सवालों को अब रक्षा अध्ययन (मिलिट्री साइंस)के छात्रों के लिए छोड़ देना चाहिए। कम से कम पटियाला-चंडीगढ़ राजमार्ग पर 15-16 साल के किशोर से 22-24 साल का युवा बारह साल पहले लड़ी गई कारगिल की लड़ाई को आज भूल चुका है। कारगिल का नाम लेते ही उसकी जेहन में गेहूं खरीदने-बेचने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनी कारगिल कौंध जाती है। इसी मार्ग पर स्थित जंगपुरा व दो अन्य शहीदों के गांवों मोई खुर्द व घड़ामा के रास्ते में जहां कहीं भी जिक्र हुआ तो अनौपचारिक बातचीत में बताया गया कि गेहूं के खरीद सीजन में किस तरह निजी कंपनियां या उनके दलाल खेत में से ही बीज के नाम पर गेहूं की खरीद कर मंडी बोर्ड को रूरल डेवलपमेंट फंड, आढ़त, सेल्स टैक्स, मार्केट फीस इत्यादि को बारह फीसदी का चूना लगा देती है। किसान को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य से 50 रुपये अधिक तक दे जाती है। याद रहे कि ये हालत देश में उस राज्य के युवा के हैं, जिसने कारगिल की लड़ाई में शहीद हुए देश के कुल 524 शहीदों में से 135 बेटे खोए। छोटे बनूड़ ब्लॉक में ही कारगिल शहीदों की संख्या तीन रही। एक राज्य जिसका सेना में कोटा चंद दशकों में 35 फीसदी से घटाकर डेड फीसदी कर दिया गया हो। एक लड़ाई में 25 फीसदी शहीद देने वाले राज्य में आखिर 12 सालों में ऐसा क्या बदलाव आया कि फौज में जाने वाला युवा कारगिल का नाम ही भूल गया। यह भी शोध का विषय है। यहां यह भी काबिले जिक्र है कि कारगिल की लड़ाई में सबसे अधिक 35 जवान खोने वाली आठ सिख रेजिमेंट रही। इसके अलावा पंजाब की धरती से जुड़ी पंजाब रेजिमेंट का स्थान रहा। जैकलाई और डोगरा रेजिमेंट से भी शहीद होने वालों में पंजाबियों की संख्या कम नहीं है। दिलचस्प है कि इन्हीं लड़कों को जब पूरी बात बताई जाती है तो अधिकतर कहते है कि सन्नी देओल के बार्डर जैसी फिल्म बना दो सब कुछ याद रहेगा। यहां तक कि इसी चर्चा में कारगिल पर बनी संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, अक्षय खन्ना, करीना कपूर जैसे सितारों से सजी बड़े बजट की मल्टी स्टार फिल्म एलओसी को साथ जोड़ा जाता है तो फिर बेशर्मी के साथ कहा जाता है कि चली नहीं होगी चली होती तो