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Friday, 15 October 2010

राज्य के एक तिहाई पुल बठिंडा क्षेत्र में

45 में से नौ पूरे हुए, नौ पर काम चालू, शेष योजना में, कुछ का अध्यन तो कुछ के टैंडर मांगे
हमने अपना काम किया अब रेलवे की बारी, बजट से उम्मीदें : ढ़ीढ़सा
भूपेश चट्ठा पटियाला:
राजनीती की मूल परिभाषा है कि योग्य व्यक्ति को हटा कर उसके स्थान पर अपने बंदे को बिठाना है आजकल इसमें उसको योग्य साबित करना भी जुड़ गया है। पंजाब में दोनों राजनीतिक दल करते भी कुछ ऐसा ही रहे है कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में बनी पिछली कांग्र्रेस सरकार में जितने रेलवे ओवर ब्रिजों पर काम शुरू हुआ, वे लगभग सभी कांग्र्रेसियों के चुनाव क्षेत्रों को ध्यान में रख कर बने। ठीक इसी रास्ते पर शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी की सरकार चल निकली है।
कांग्र्रेस की तुलना में अकाली-भाजपा सरकार तीन गुना पुल राज्य में बनवाने जा रही है। इनमें से इक्का-दुक्का पुलों का एक हिस्सा किसी कांग्र्रेसी विधानसभा क्षेत्र में संभवत: उतरता हो इससे इनकार नहीं है, लेकिन बंटवारा पूरी तरह से पार्टी लाइन को ध्यान में रखकर किया गया है। इन आरओबी का नाम ही स्पष्ट कर देता है। इतना ही नहीं विकास का बड़ा हिस्सा उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की पत्नी हरसिमरत कौर के लोकसभा क्षेत्र बठिंडा के खाते में आया है। इस क्षेत्र में दस आरओबी व अंडर ब्रिज प्रस्तावित हैं। दिलचस्प है कि बठिंडा शहर में परसराम नगर व मुलतानियां में दो पुल चल रहे हैं। मानसा फाटक व डबवाली की ओर दो पर काम चल रहा है। शहर में अंडर ब्रिज भी हैं।
राज्य में बिकने वाले पेट्रोल पर लगने वाले अतिरिक्त कर से होने वाली आमदनी से पंजाब इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड राज्य में मूलभूत ढांचागत सुविधाओं का निर्माण करवाता है। 25 से 30 करोड़ रुपये के खर्च वाला एक आरओबी का निर्माण अगर लोक निर्माण विभाग करवाता है तो बिल्ट आन आपरेट का सिद्धांत जुड़ जाता है। यानी पुल की लागत बाद में वसूली जाती है।
वहीं पीआईडीबी की ओर से प्रदेश में चल रहे आरओबी पर फाइलें बोलती हैं कि नौ आरओबी को वर्तमान सरकार ने चालू किया है। इनमें दो धूरी, एक लहरागागा, फगवाड़ा, पटियाला, दसूहा, अबोहर, व सुच्ची मंडी शामिल हैं। जबकि जिन आरओबी पर काम चल रहा है, उनमें तीन बठिंडा, एक-एक मानसा, मलोट, डबवाली रोड, गिद्दड़बाहा, बीबीपुर फाटक के पास सूरानासी (बठिंडा) के नाम शामिल हैं। तलवंडी साबो रोड पर बनने वाले आरओबी की फिजीबिल्टी रिपोर्ट मांगी गई है।
राज्य में बनने वाले, योजना में शामिल करीब 36 आरओबी व अंडर ब्रिजों में कुछ का सर्वेक्षण जारी है तो कुछ के टेंडर मांग लिए गए हैं। इनमें एक धूरी, मकसूदां (जालंधर शहर), खालसा कालेज (जालंधर), टांडा, अमृतसर में ज्वाला फ्लोर मिल के पास, ब्लास, बटाला, मोरिंडा बाइपास, जगरांव, फतेहगढ़ साहिब, फिरोजपुर के अलावा समराला रोड पैल, एसडी कालेज के पास बरनाला, ललहोड़ी रोड खन्ना, फिल्लौर रोड बंगा, मुकेरियां, रायकोट रोड मलेरकोटला, भीखी रोड अमृतसर, शंभू यार्ड, रतिया रोड वुडलाडा, छजली के निकट सुनाम, गोरेना रोड जाखल, अनाज मंडी पास सुनाम, साइंस सिटी कपूरथला व गोबिंदगढ़ के नाम प्रमुख हैं।
राज्य में बन रहे ओवर ब्रिज पर लोक निर्माण मंत्री परमिंदर सिंह ढींडसा कहते हैं कि दस के करीब और योजना में हैं। कइयों पर हमने अपना काम पूरा कर दिया है। अब रेलवे की बारी है। उन्होंने अपना हिस्सा बनाना है। वे कहते हैं कि रेलवे से उपमुख्यमंत्री व मुख्यमंत्री ने भी बार-बार गुहार लगाई है कि राज्य में ट्रैफिक की स्थित को सुधारने पुलों का निर्माण जल्दी निपटाया जाए। ढींडसा कहते हैं कि उन्हें रेलवे बजट से खासी उम्मीदें हैं। वहीं बठिंडा के नाम आरओबी की संख्या अधिक होने के सवाल पर वे कहते हैं कि मालवा क्षेत्र पिछड़ा हुआ है और सरकार की जिम्मेदारी पूरे प्रदेश का विकास करने की है।