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Tuesday, 27 December 2011

एक्सट्रा धन बैंक में, लोग कानूनी फेरे में, code conduct, black money, income tex


उम्मीदवारों की ओर से सेकेंड लाइन लीडरों को बांटे जाने वाले काले धन को रोकने की कवायद

उप मुख्य संवाददाता, पटियाला
आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद एक लाख रुपये से अधिक की नगदी लेकर चलने वालों पर की गई कार्रवाई से पकड़ा गया 'एक्सट्रा' धन जहां आयकर विभाग के माध्यम से फिर बैंक में चला गया, वहीं नगदी लेकर चलने वाले लोग कानून के फेरे में पड़ गए हैं।
आयकर विभाग के एक अधिकारी बताते हैं कि उनके पास केस आने के बाद पकड़ा गया धन बैंक में जमा करवा दिया जाता है। कंपनी अथवा संबंधित व्यक्ति के खातों की जांच की जाती है, कि क्या उक्त कंपनी ने नगद राशि अपनी किताबों में दर्ज करवाई है अथवा नहीं। इसके बाद विभाग कार्रवाई करता है।
दिलचस्प है कि पकड़ा गया ये पैसा विभाग की ओर से किए जाने वाले अन्य सर्वे अथवा छापेमारी से अलग है। इसमें मौके पर ही धनराशि का सरेंडर कर आरोपी अपने लिए पेनल्टी सहित टेक्स की राशि की जानकारी प्राप्त कर सकता है और जमा भी करवा सकता है। इसके साथ ही शेष राशि का प्रयोग एक नंबर के पैसे के रूप में कर सकता है। अधिकारी बताते हैं कि राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों व उनके समर्थकों पर चुनाव आयोग की ओर से चुनाव पर होने वाले क्षेत्रों में जारी किए गए निर्देश चुनावों में काला धन आने से रोकने और एक निश्चित सीमा से अधिक खर्च करने पर पाबंदी लगाने के लिए हैं। इसके तहत एक लाख रुपये से अधिक नगदी साथ लेकर चलने पर पाबंदी है।
वहीं एडवोकेट मनोज सोईन कहते हैं कि एक कानून तो यह कहता है कि 20 हजार रुपये से ऊपर का लेन-देन आप सिर्फ चेक से ही करेंगे, लेकिन बैंक से रकम इससे ऊपर की भी निकाली जाती है। कोई व्यक्ति ऐसा तभी करता है जब इमरजेंसी या कैजुअल्टी हो या फिर कोई सौदा करना हो। बैंक से निकले पैसों पर आयकर विभाग कुछ नहीं कर सकता। ठीक ऐसे ही यदि कोई व्यक्ति एक लाख या अधिक राशि के साथ पकड़ा जाता है तो पंजाब में उसका तर्क आढ़ती से पैसा लाने और उधारी चुकाने का होना लगभग तय है। ऐसे में व्यक्ति ने खुद ही विभाग के पास आढ़ती को बही सहित ले जाकर और एक ऐसे व्यक्ति को ले जाना होगा जो ये बताए कि हां उसने उधार दिया था और बस कहानी खत्म। हालांकि वे ये भी कहते हैं कि इस कानून से चुनाव दौरान सर्कुलेट होने वाला वो काला धन जरूर रुकेगा जो उम्मीदवार आगे सेकेंड लाइन लीडरों को बांटते हैं।
दूसरी और पटियाला डिवीजन के आयकर आयुक्त जीएस नेगी ने इस संबंध में किसी तरह की टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। कानूनी रूप से लगने वाली पेनाल्टी पर भी वे कुछ भी बोलने से इंकार करते हैं।