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Saturday, 18 June 2011

अनजान बन रहा जागरुक किसान, direct soawing, 16 may



जल संरक्षण


-पानी की खपत सीधी बिजाई में 40 फीसदी रह जाती है, सीधा लाभ छह से सात हजार रूपये प्रति एकड़

भूपेश चट्ठा, पटियाला

पंजाब के भूमिगत जल स्तर का दिवाला निकालने वाली धान की खेती में ही अब जल संरक्षण की किरण दिखाई देने लगी है। किसानों में बेहतरीन परिणाम दे रही धान की सीधी बिजाई तकनीक हर साल तीन सौ फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है। शुरूआती झटकों के बाद इसकी लोकप्रियता की गति इतनी तेज हो गई है कि कृषि विभाग को सीधी बिजाई करने अथवा किराये पर मशीन दे करवाने के लिए इस साल मशीनों की संख्या को बढ़ा कर दो गुना करना पड़ा है। हालांकि धान का बीज छिड़ककर सीधी बिजाई अभी प्रोग्रेसिव हो चुके किसानों के गले नहीं उतर रही है। एक जून से शुरू हो गई सीधी बिजाई पर मुख्य कृषि अधिकारी सुभाष चंद्र खुराना बताते हैं कि बीते साल यहां रकबा 17 सौ एकड़ था जो इस बार पांच हजार एकड़ के पार जाना तय है। वे कहते हैं कि पिछले साल विभाग के पास मात्र तीन मशीनें थी लेकिन इस साल मांग को देखते हुए हर ब्लाक के लिए एक मशीन का प्रबंध कर इन्हें बढ़ा कर छह कर दिया गया है। आत्मा योजना के तहत खरीदी गई इस मशीन से बिजाई करवाने पर किसान से मात्र 50 रुपये प्रति एकड़ की वसूली की जाती है जबकि मजदूरों से रोपाई करवाने पर 15 सौ से दो हजार रुपये तक चुकाने पड़ते हैं। सीधी बिजाई का लाभ ही लाभ है। पर्यावरण के लिहाज से देखें तो 5500 लीटर पानी पी जाने वाला एक किलो चावल सीधी बिजाई से आधा ही पानी पीएगा। इस विधि से फसल में कमी बिलकुल नहीं देखी गई अलबत्ता इसके बढऩे की उम्मीद जरूर बन पड़ी है। खुराना के अनुसार 35-40 हजार रुपये की ड्रिल मशीन एक दिन में आठ से दस एकड़ में आसानी से बिजाई कर देती है। जून के पहले दो सप्ताह में यदि आप धान की पीआर अथवा पूसा किस्में लगा सकते हैं तो 15 जून के बाद से बासमती व 1121 जैसी अधिक मुनाफा देने वाली मंहगी किस्मों की बिजाई कर सकते हैं। खेती विरासत मिशन के डायरेक्टर उमेंद्र दत्त कहते हैं कि इस तकनीक से पानी की बचत होती है। यह साबित हो गया है। कई मामलों में तो पानी की खपत मात्र एक तिहाई ही रह रही है, लेकिन इसमें खरपतवार की समस्या है इसे दूर किया जाना है। वे कहते हैं कि खेत में अनावश्यक रूप से उगे वीड्स को समाप्त करने के लिए हमें वीड्ीसाइड डालने से बचना चाहिए। तकनीक चूंकि इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीटयूट मनीला से आई है। ऐसे में हमे इसे पंजाब लायक बनाने में थोड़े प्रयोग करने पड़ेंगे। इसके लिए जरूरी है कि राइस इंटेंसिफाई तकनीक का मिश्रण इसमें किया जाए। खेत में ही वीड्स की गुड़ाई करने से वे आर्गेनिक खाद के रूप में फसल के काम आएंगे और मंहगी तथा कथित दवाओं पर किसानों का खर्च भी नहीं होगा। इस तरह से बिजाई करने पर पौधा न केवल जल्दी पनपता और फसल पकती है, बल्कि धान के बाद गेहूं की बिजाई करने को समय भी अधिक मिलता है। पर्यावरण में मिथेन गैसों का रिसाव बहुत कम होता है। पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने मंगलवार से कृषि क्षेत्र को बिजली सप्लाई बढ़ा कर चार घंटे कर दी है, यह सप्लाई धान की इस तरह से बिजाई करने वालों के लिए कितनी फायदेमंद रहेगी इस पर कृषि विभाग तो खामोश पर अब यह मांग भी उठने लगी है कि सीधी बिजाई करने वाले किसानों को एक जून से ही आठ घंटे बिजली सप्लाई दी जाए, बोनस के रूप में दिया जाने वाला लाभ किसानों को इस ओर आकर्षित ही करेगा।